लखनऊ: उत्तर प्रदेश की कड़ाके की ठंड के बीच सियासी तापमान अचानक बढ़ गया है। राजधानी लखनऊ से लेकर दिल्ली के सत्ता गलियारों तक एक ही चर्चा है — आखिर उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की हालिया गोपनीय मुलाकात के पीछे असली कहानी क्या है?

यह मुलाकात महज़ शिष्टाचार भेंट नहीं मानी जा रही। सूत्रों के मुताबिक, इसके तार हाल ही में हुई ब्राह्मण विधायकों की गोलबंदी से जुड़े हैं, जिसने यूपी बीजेपी के भीतर हलचल मचा दी है। आने वाले 2027 विधानसभा चुनावों से पहले पार्टी के “सोशल इंजीनियरिंग” समीकरणों को लेकर कई बड़े बदलावों की चर्चाएं तेज़ हो गई हैं।


‘ब्राह्मण एकजुटता’ से सरकार के कान खड़े

पूरे घटनाक्रम की शुरुआत 23 दिसंबर को लखनऊ में हुई, जब कुशीनगर के बीजेपी विधायक पीएन पाठक के घर एक ‘सहभोज’ का आयोजन हुआ।
कहने को तो यह एक सामाजिक कार्यक्रम था, लेकिन जब करीब 40 ब्राह्मण विधायक एक साथ वहां जुटे, तो यह मीटिंग राजनीतिक संकेतों से भर गई।

उत्तर प्रदेश विधानसभा में कुल 52 ब्राह्मण विधायक हैं, जिनमें से 46 बीजेपी के हैं। राजनीतिक जानकार मानते हैं कि यह बैठक ब्राह्मण समाज के बढ़ते असंतोष और हिस्सेदारी की मांग का प्रतीक है।
यह भी कहा जा रहा है कि ब्राह्मणों की यह एकजुटता बीजेपी के कोर वोट बैंक पर बड़ा असर डाल सकती है।


दिल्ली में पीएम से मुलाकात, बढ़ी अटकलें

इस ‘ब्राह्मण शक्ति प्रदर्शन’ के सिर्फ 72 घंटे बाद, डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक अचानक दिल्ली पहुंच गए। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात की और इस भेंट की तस्वीर सोशल मीडिया पर साझा करते हुए इसे “प्रेरणादायी” बताया।

आधिकारिक तौर पर बताया गया कि पाठक प्रधानमंत्री को वाराणसी में होने वाली नेशनल वॉलीबॉल चैंपियनशिप में आमंत्रित करने पहुंचे थे।
हालांकि राजनीतिक हलकों में माना जा रहा है कि मुलाकात का असली मकसद कुछ और था — ब्राह्मण विधायकों की चिंताओं, सत्ता संतुलन और कैबिनेट विस्तार के संकेतों को सीधे पीएम तक पहुँचाना।


बीजेपी के लिए ‘ब्राह्मण फैक्टर’ की अहमियत

2027 के विधानसभा चुनावों से पहले बीजेपी अपने अंदरूनी समीकरणों को फिर से मजबूत करने में जुटी है। पार्टी को पता है कि यूपी में सत्ता का रास्ता अब भी ब्राह्मण-ठाकुर-महादलित गठबंधन के संतुलन पर टिकता है।

ब्रजेश पाठक न सिर्फ ब्राह्मण समाज का बड़ा चेहरा हैं बल्कि लॉ एंड ऑर्डर के मोर्चे पर योगी सरकार का सशक्त चेहरा भी हैं।
इसलिए राजनीतिक विश्लेषक मानते हैं कि उनका दिल्ली दौरा भविष्य के किसी बड़े फैसले या फेरबदल की ओर इशारा कर रहा है।


कैबिनेट विस्तार और नई रणनीति की सुगबुगाहट

बीजेपी ने हाल ही में उत्तर प्रदेश में नए प्रदेश अध्यक्ष की नियुक्ति की है। उसी के साथ, मंत्रिमंडल विस्तार की चर्चा भी जोरों पर है।
कई सूत्र मानते हैं कि प्रधानमंत्री और डिप्टी सीएम की मुलाकात दरअसल उस बड़े ‘मिशन 2027’ प्लान का हिस्सा है, जिसमें पार्टी जातीय समीकरण और क्षेत्रीय संतुलन को नए सिरे से व्यवस्थित कर रही है।

विपक्ष इसे बीजेपी की “आंतरिक कलह” बता रहा है, लेकिन सियासी विश्लेषक इसे एक “सोशल इंजीनियरिंग री-बैलेंसिंग” मानते हैं — जिसकी अगुवाई अब खुद प्रधानमंत्री स्तर से हो रही है।


आगे क्या? सस्पेंस बरकरार

फिलहाल, ब्रजेश पाठक और प्रधानमंत्री की बैठक के बाद न तो कोई आधिकारिक बयान आया है और न ही पार्टी ने किसी बदलाव की घोषणा की है।
लेकिन राजनीतिक गलियारे मान रहे हैं कि आने वाले दिनों में उत्तर प्रदेश की राजनीति में बड़ा reshuffle या रणनीतिक संकेत देखने को मिल सकता है।

क्या ब्रजेश पाठक को नई जिम्मेदारी मिलेगी?
क्या कैबिनेट में भारी फेरबदल होगा?
या फिर यह सिर्फ 2027 के लिए पार्टी की “सोच को साधने” की रणनीति है?

फिलहाल, सियासत का पारा ठंड से कहीं ज़्यादा गर्म है, और हर किसी की निगाहें अब दिल्ली दरबार के अगले फैसले पर टिक गई हैं।

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