त्रिशूर (केरल): केरल की राजनीति में कांग्रेस के लिए एक और बड़ा झटका सामने आया है। त्रिशूर जिले की मट्टूर पंचायत में हैरान कर देने वाला राजनीतिक उलटफेर हुआ है, जहां कांग्रेस के सभी 8 सदस्यों ने सामूहिक रूप से इस्तीफा देकर पार्टी को बुरी तरह झकझोर दिया।
भाजपा समर्थित निर्दलीय ने थामा पंचायत की बागडोर
इन 8 कांग्रेस सदस्यों के इस्तीफे के बाद पंचायत में नई शक्ति-संतुलन की स्थिति बन गई। इस मौके का फायदा उठाते हुए भाजपा के समर्थन से निर्दलीय उम्मीदवार टैसी जोस को मट्टूर पंचायत का नया अध्यक्ष चुन लिया गया। पंचायत की सत्ता परिवर्तन की यह कहानी केरल कांग्रेस के लिए गहरी चिंता का विषय बन गई है।
स्थानीय सूत्रों के अनुसार, यह कदम अचानक नहीं बल्कि अंदरूनी मनमुटाव, विचारधारात्मक मतभेद और संगठन की कमजोर होती पकड़ का परिणाम है।
जमीनी स्तर पर कांग्रेस की पकड़ कमजोर
राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि मट्टूर पंचायत की यह घटना कोई अलग मामला नहीं, बल्कि जमीनी स्तर पर कांग्रेस की गिरती लोकप्रियता का संकेत है। हाल के महीनों में राज्य के विभिन्न हिस्सों से लगातार ऐसी ख़बरें मिल रही हैं, जहाँ कांग्रेस के कार्यकर्ता और स्थानीय नेता या तो पार्टी छोड़ रहे हैं या विरोध में उतर आए हैं।
यह घटनाक्रम राज्य में होने वाले भविष्य के स्थानीय निकाय चुनावों के लिए कांग्रेस के संघटनात्मक संकट का साफ़ संकेत देता है।
बीजेपी को दक्षिण में नई हवा का एहसास
मट्टूर पंचायत में जो हुआ, उसने भाजपा खेमे में उत्साह बढ़ा दिया है। पार्टी नेताओं ने इसे केरल में बदलती राजनीतिक हवा का उदाहरण बताया है। भाजपा का मानना है कि धीरे-धीरे जनता कांग्रेस और वाम मोर्चे से विमुख होकर नई राजनीतिक ताकतों की ओर आकर्षित हो रही है।
विपक्षी दलों के भीतर असंतोष और टूट के ये घटनाक्रम आने वाले महीनों में केरल की सत्ता समीकरणों को पूरी तरह बदल सकते हैं।