मुंबई।
बॉलीवुड एक्ट्रेस शिल्पा शेट्टी कुंद्रा को लेकर इंटरनेट पर फैली डीपफेक और मॉर्फ्ड तस्वीरों पर बॉम्बे हाईकोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है। कोर्ट ने अभिनेत्री द्वारा दायर ‘पर्सनैलिटी राइट्स’ सूट पर सुनवाई करते हुए कहा कि किसी भी व्यक्ति, खासकर महिला की निजी छवि या आवाज का उपयोग बिना अनुमति नहीं किया जा सकता।
कोर्ट की सख्त टिप्पणी
न्यायमूर्ति अद्वैत एम. सेठना (Justice Advait M. Sethna) की अवकाशकालीन पीठ ने सुनवाई के दौरान कहा कि सोशल मीडिया पर अभिनेत्री की तस्वीरों और वीडियो के साथ छेड़छाड़ कर बनाए गए डीपफेक कंटेंट “बेहद परेशान करने वाले, झूठे और अशोभनीय” हैं।
अदालत ने टिप्पणी की — “किसी महिला के व्यक्तित्व को इस तरह से चित्रित करना, जिससे उसके सम्मान और निजता का हनन हो, अस्वीकार्य और संविधान के अनुच्छेद 21 के खिलाफ है।”
शिल्पा शेट्टी की छवि को नुकसान
कोर्ट ने माना कि शिल्पा शेट्टी एक प्रतिष्ठित फिल्म और टीवी शख्सियत हैं जिनके इंस्टाग्राम पर 3.33 करोड़ से अधिक फॉलोअर्स हैं। ऐसे में इस तरह का फेक और मॉर्फ्ड कंटेंट न केवल उनकी छवि और प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचाता है बल्कि उनके सम्मानपूर्वक जीवन जीने के अधिकार का उल्लंघन भी करता है।
सभी प्लेटफॉर्म्स को हटाने का आदेश
बॉम्बे हाईकोर्ट ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स, वेबसाइट्स और AI कंपनियों को आदेश दिया कि शिल्पा शेट्टी की मॉर्फ्ड तस्वीरों और डीपफेक वीडियो से जुड़े सभी URL, लिंक और पोस्ट तुरंत हटाए जाएं या उन पर एक्सेस प्रतिबंधित किया जाए।
इसके अलावा, अदालती आदेश के अनुसार बिना अनुमति उनके नाम, आवाज या पहचान का व्यावसायिक लाभ के लिए इस्तेमाल भी प्रतिबंधित रहेगा।
अवैध विज्ञापन और साड़ी बिक्री का भी जिक्र
शिल्पा शेट्टी की वकील सना रईस खान ने अदालत को बताया कि अभिनेत्री की तस्वीरों और पहचान का इस्तेमाल बिना अनुमति साड़ियों और फैशन उत्पादों की बिक्री में किया जा रहा है। यह न केवल कॉपीराइट अधिनियम का उल्लंघन है बल्कि उनके पब्लिसिटी और पर्सनैलिटी राइट्स का भी हनन है।
कोर्ट ने कहा — हर नागरिक को सम्मानपूर्वक जीवन का अधिकार
हाईकोर्ट ने संविधान के अनुच्छेद 21 का हवाला देते हुए कहा कि हर नागरिक को सम्मान के साथ जीने और निजता बनाए रखने का मौलिक अधिकार है।
बिना सहमति किसी व्यक्ति की तस्वीर या वीडियो का उपयोग करना इस अधिकार का सीधा उल्लंघन है। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि पब्लिसिटी और पर्सनैलिटी राइट्स से जुड़े गहन कानूनी पहलुओं पर फैसला नियमित बेंच करेगी, लेकिन फिलहाल यह अंतरिम आदेश जारी किया गया है।